What is D.I.E.T. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षित डाइट मेंटर

What is D.I.E.T. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षित डाइट मेंटर के बारे में आज की इस पोस्ट में हम जानने वाले हैं की क्या होता है डाइट और उसके कार्य उसकी संस्थाएं, विभाग अधिकारी,कर्मचारी आदि|

भारत में शिक्षा के पूर्व प्राथमिक , प्राथमिक तथा उच्च प्रथमिक स्तरों में गुणात्मक सुधार, इन विद्यालयों के शिक्षकों की उन्नति के लिए, इस स्तर पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति , 1986 में जिला स्तर पर एक ऐसी संस्था स्थापित करने की बात कही गई है जो जिले के या अध्यापकों की व्यावसायिक उन्नति तथा विकास के लिए समुचित कार्य कर सके| इस प्रकार की संस्था को डाइट कहते हैं|

डाइट (D.I.E.T.) की स्थापना

राष्ट्रीय शिक्षा नीति , 1986 में निर्धारित शिक्षा नीति के अधीन अक्टूबर , 1987 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना का कार्य प्रारम्भ हुआ| इन संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य प्राथमिक एवं प्रोढ़ शिक्षा के क्षेत्रों में अपनाई गई विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों को निचले स्तर पर सफलता के लिए शिक्षा एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करना है|

डाइट (D.I.E.T.) के विभिन्न विभाग

इसके सभी कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस संस्थान में निम्नलिखित विभाग हैं-

  • सेवापूर्व अध्यापक प्रशिक्षण विभाग
  • प्रौढ़ शिक्षा तथा अनौपचारिक शिक्षा विषयक जिला साधन इकाई
  • कार्यानुभव विभाग
  • सेवारत कार्यक्रम, क्षेत्रीय संपर्क तथा प्रवर्तन समन्वय विभाग|
  • पाठ्यक्रम, सामग्री विकास का मूल्यांकन विभाग|
  • नियोजन तथा प्रबंधन विभाग
What is D.I.E.T. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षित डाइट मेंटर
What is D.I.E.T. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षित डाइट मेंटर

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डाइट (D.I.E.T.) हेतु मानवीय तथा भौतिक संसाधन

जिला शिक्षा तथा प्रशिक्षण संस्थान के लिए प्रस्तावित मानवीय तथा भौतिक संसाधन को हम दो भागों में बाँट सकते हैं-

  1. डाइट (D.I.E.T.) के अधिकारी और कर्मचारी
  2. डाइट के भौतिक संसाधन

१- डाइट (D.I.E.T.) के अधिकारी और कर्मचारी

प्रत्येक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण में एक प्राचार्य तथा स्टेनो या एक पद है | इसके अतिरिक्त विभिन्न इकाइयों में कार्यरत अधिकारीयों एवं कर्मचारियों का विवरण निम्नवत हैं –

  • सेवापूर्व अध्यापक प्रशिक्षण विभाग:- इसमें एक उप-प्राचार्य , आठ प्रवक्ता एक प्रयोगशाला सहायक पद शामिल है|
  • कार्यानुभव विभाग:- इसके अंतर्गत एक वरिष्ठ प्रवक्ता, एक प्रवक्ता तथा एक कार्यानुभव शिक्षक का पद है|
  • प्रौढ़ शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा विषयक जिला साधन इकाई:- इसमें एक वरिष्ठ प्रवक्ता, चार प्रवक्ता, एक आशुलिपिक तथा एक लिपिक का पद होता है|
  • सेवारत कार्यक्रम, क्षेत्रीय संपर्क तथा प्रवर्तन समन्वय विभाग:- इसके अंतर्गत एक वरिष्ठ प्रवक्ता, एक प्रवक्ता तथा एक लिपिक का पद होता है|
  • नियोजन तथा प्रबंधन विभाग:- इसके अंतर्गत एक वरिष्ठ प्रवक्ता, एक प्रवक्ता तथा एक सांख्यिक का पद होता है|
  • पुस्तकालय विभाग:-इसमें एक पुस्तकालय कक्ष , पुस्तकालाध्यक्ष तथा एक लिपिक का पद होता है|
  • प्रसाशनिक अनुभाग:- इसके अंतर्गत एक कार्यालय, अधीक्षक , एक लेखाकार तथा पांच लिपिक,(जिनमें एक छात्रावास के लिए ) के पद हैं|
  • पाठ्यक्रम सामग्री विकास एवं मूल्यांकन विभाग:- इसके अंतर्गत एक वरिष्ठ प्रवक्ता तथा एक प्रवक्ता का पद है|
  • शैक्षिक प्रौद्योगिकी विभाग:- इसके अंतर्गत एक वरिष्ठ प्रवक्ता , एक प्रवक्ता तथा एक तकनीकी विशेषज्ञ का पद है|

इसक प्रकार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में एक प्राचार्य , एक उप-प्राचार्य , छः वरिष्ठ प्रवक्ता, 17 प्रवक्ता, एक कार्यानुभव शिक्षक, एक तकनीकी विशेषज्ञ , एक पुस्तकालाध्यक्ष , एक सांख्यिक , एक कार्यालय अधीक्षक, ११ लिपिक वर्गीय पद- लेखाकार, लिपिक, प्रयोगशाला सहायक, प्राचार्या का आशुलिपिक तथा 6 परिचारकों के वतन क्रम के पद हैं| इस प्रकार प्रत्येक डाईट में कुल पद 48 हैं|

२- डाईट के भौतिक संसाधन:-

डाईट के भौतिक संसाधनों का विवरण इस प्रकार है-

  • संस्थान का परिवेश अच्छा होना चाहिए| कार्यानुभव के अंतर्गत कृषि होने की दशा में पांच एकड़ भूमि की उपलब्धता अनिवार्य है|
  • संस्थान के भवन का क्षेत्रफल (जिसके अंतर्गत सभागार , वाचनालय कक्ष, कार्यानुभव कक्ष, कक्षा-कक्ष,अधिकारीयों , प्राचार्य तथा प्रवक्ता के कक्ष आदि सम्मिलित होने चाहिए|), 6 हजार वर्ग फूट होना चाहिए|
  • डाईट में कार्यरत कम से कम 50% कर्मचारी हेतु एक , दो , तीन, चार, टाइप के आवास की सुविधा होनी चाहिए|
  • प्रशिक्षनार्थियों हेतु आवश्यक सुविधाओं से युक्त एक छात्रावास की सुविधा भी जरूरी है| इसके अतिरिक्त काष्ठोपकरण (फर्नीचर) , साज-सज्जा एवं उपकरणों एवं अन्य उपकरणों की समुचित व्यवस्था भी आवश्यक है|
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