Type of children of educational Inclusion | Gifted Children | प्रतिभाशाली बच्चे

Type of children of educational Inclusion Gifted Children प्रतिभाशाली बच्चे

Type of children of educational Inclusion | Gifted Children | प्रतिभाशाली बच्चे, दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम पढ़ने वाले हैं शैक्षिक समावेशन बालको के प्रकार जिसमें कई प्रकार के बच्चे होते हैं जैसे प्रतिभाशाली बच्चे, पिछड़े बच्चे,धीमी गति से सीखने वाले बच्चे लेकिन इस पोस्ट में हम आपको प्रतिभाशाली बच्चो के बारे में बताएँगे उनकी विशेषताएं,उनकी समस्याएं आदि सब कुछ जानने के लिए आपको पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक पढ़ना पड़ेगा यदि आप deled या बीएड कर रहे हैं तो ये पोस्ट आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है खासकर उन लोगो के लिए जो deled third सेमेस्टर में होंगे?

इन्हें मेधावी बच्चे भी कहते हैं | इन बच्चों की उच्च बुद्धि होने के कारन इन्हें विशिष्ट बच्चों में रखा गया  है | ये बच्चे सामान्य बच्चो से अलग होते हैं | इन बच्चो की अपनी एक विशेषता होती है | जिनके कारन इन्हें अन्य बच्चो से अलग रखा जाता है व् उसी के अनुरूप इन्हें शिक्षा प्रदान की जाती ही|

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प्रतिभाशाली बच्चों का अर्थ-(Meaning of Gifted children )

जो बच्चा मानसिक आयु में अपनी आयु वर्ग के सभी बच्चो से अधिक होता है , उसे प्रतिभाशाली बच्चों के अंतर्गत रखा जाता है, यह बच्चा शारीरिक,संवेगात्मक आदि अन्य दृष्टियों से भी अन्य बच्चो से अलग होता है, वह बच्चा जो किसी भी बात को बड़ी जल्दी सीख लेता है और जल्दी भूलता भी नहीं है वह मेधावी बालक कहलाता है|

अतः जो बच्चे बौद्धिक दृष्टि से किसी नयी बात को या नए ज्ञान को शीघ्रता से सीखने की क्षमता रखते हैं उन्हें प्रतिभाशाली बच्चे कहते हैं , in बच्चों की बुद्धि-लब्धि 140 से अधिक होती है|

 

कुछ महान मनोवैज्ञानिकों ने अपने विचार इनके बारे में दिए हैं आइये जानते हैं –=

पसरीचा (Pasricha) के अनुसार– प्रतिभाशाली बच्चा वह है जो सामान्य बुद्धि की दृष्टि से श्रेष्ठ होता है या ,जो उन क्षेत्रों में जिनका अधिक बुद्धि से सम्बंधित होना आवश्यक नहीं है, उच्च कोटि की विशिष्ट योग्यताएं रखता है|

 

टर्मन व ओडन के अनुसार – प्रतिभाशाली बच्चे शारीरिक गठन में , सामाजिक समायोजन में , ब्यक्तित्व के लक्षणों , खेल की सूचनाओं व् रुचियों में सामान्य बच्चों से श्रेष्ठ होते हैं|

 

डब्ल्यू.बी. कॉलसनिक  (W.B. Kolesnik)- वह प्रत्येक बालक जो अपने आयु स्तर के बच्चों में किसी योग्यता से अधिक हो और जो हमारे समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण नया योगदान कर सकें |

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प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताएं(Charactaristics of Gifted Childrens)

शारीरिक विशेषताएं ( Physical Characteristics)

  1. प्रतिभाशाली बालक शारीरक विशेषताओं में सामान्य बालको से भिन्न होते हैं , यह विभिन्नताएं कद,भार और सामान्य शारीरिक विकास के रूप में होती हैं|
  2. विशिष्ट बुद्धि वाले बच्चों में शारीरिक दोष भी बहुत कम होते हैं|
  3. टरमन और विट्टी ने प्रतिभाशाली बालकों और उनके माता-पिता के स्वस्थ्य के इतिहास का अध्ययन करने के पश्चात यह पाया की प्रतिभाशाली बालक व् उनके माता पिता सामान्य बालकों और उनका माता-पिता से अधित स्वस्थ्य होते हैं तथा यह सामान्य बच्चों से भारी होते हैं|
  4. प्रतिभाशाली बालक के सामान्य बालक की अपेक्षा दो महीने पहले दांत निकल आते हैं | इसी प्रकार वे सामान्य बालकों से दो महीने पहले चलना-फिरना और बोलना शुरू कर देते हैं|
  5. इनकी ज्ञान-इन्द्रियां प्रखर होती हैं|
  6. प्रतिभाशाली बालकों में किशोरावस्था के लक्षण शीघ्र दिखाई देते हैं|

 

संवेगात्मक विशेषताएं (Emotional Charactaristics)

  1. संवेगात्मक रूप से प्रतिभाशाली बालक स्थिर और समायोजन होते हैं|
  2. प्रायः प्रसन्न रहते हैं और समस्याओं तथा कठिनाइयों का स्वतंत्रता से सामना करने को महत्त्व देते हैं| यह अधिक धैर्यवान होते हैं|
  3. नए लोगों के साथ नए स्थानों पर नई स्थितियों में ये बालक शीघ्र ही समायोजन कर लेते हैं|
  4. इनका चरित्र और व्यक्तित्व साधारणतः दूसरे बालकों से श्रेष्ट होता है|
  5. इस प्रकार के बालक सामाजिक दृष्टि से भी सुदृढ़ होते हैं|

 

सामाजिक विशेषताएं (Social Charactaristics)

  1. प्रतिभाशाली बालक , क्योंकि हंसमुख व् प्रसन्नचित रहते हैं , अतः वे सामाजिक तौर पर अधिक परिपक्व तथा सर्वप्रिय होते हैं|
  2. ऐसे बालक अपनी आयु स्तर से अधिक आयु के स्तर वाले बालकों को मित्र बनाना पसंद करते हैं, लेकिन खेलना वे अपनी आयु स्तर के बालकों के साथ ही पसंद करते हैं|
  3. ऐसे बालक घर,स्कूल, तथा समुदाय के अन्य कार्यों की जिम्म्देदारी लेना बहुत पसंद करते हैं |
  4. इनमें नेतृत्व की विशेषताएं बहुत होती हैं|
  5. सामाजिक समायोजन के दो पक्ष होते हैं-मिलने जुलने की योग्यता और सामाजिक रूप से लाभकारी बनने की योग्यता, कई बार प्रतिभाशाली बालक में मिलने-जुलने की योग्यता में कमी पाई गई है| उसकी सृजनात्मक गतिविधियां उसके सामाजिक तौर पर लाभकारी होने का संकेत होता है, in लाभकारी कार्यों में साहित्यिक रचना , शोधकार्य , खोज आदि सम्मिलित हैं|
  6. टरमन ने 1925 में 500 प्रतिभाशाली बालको के अध्ययन के पश्चात यह निष्कर्ष निकाला की वे अधिक ईमानदार , विषय परिस्थियों में विश्वसनीय होते हैं | इनके विचार तथा निर्णयों में दृढ़ता होती है|

लिंग विशेषताएं (Sex Charactiristics )

लडके और लड़कियों में कौन अधिक प्रतिभाशाली होते हैं ये अभी तक संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है| कई अध्ययनों में लड़कों की बुद्धि लब्धि लड़कियों की बुद्धि लब्धि से अधिक पाई गई है| टरमन (1925) 643 विद्यालय के बच्चों में से 121 प्रतिभाशाली लड़के और केवल 100 प्रतिभाशाली लड़कियों को ही पहचान पाए| लेकिन जैनकिंस (1936) की नीग्रो जनसँख्या के अध्ययन में अधिक प्रतिभाशाली लड़कियां मिलीं| इसलिए इसे एकतरफा कह पाना मुश्किल है|

 

शैक्षणिक उपलब्धि ( Educational Achievement)

  • बौद्धिक रूप से  सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति शैक्षिक उपलब्धि को बहुत महत्त्व देता है|
  • ऐसे बालक शिक्षा के प्रत्येक क्षेत्र में अधिक उपलब्धियां प्राप्त करते हैं|
  • प्रतिभाशाली बालक साहित्य,विज्ञान , ब्याकरण, गणित, इतिहास, भूगोल आदि विषयों में अध्यापक द्वारा श्रेष्ठ घोषित होते हैं|
  • ये बालक उन विषयों में अधिक श्रेष्ठता प्रदर्शित नहीं करते जिनका सम्बन्ध बुद्धि से ना हो, अर्थात जैसे- दुकान का कार्य, सिलाई, कला आदि|
  • बुद्धि और उपलब्धि का सह-सम्बन्ध ऐसे बालकों में अत्यधिक मिलेगा|
  • पुरुस्कार और छात्रवृत्तियां जीतने में भी प्रतिभाशाली बालक सबसे आगे रहते हैं | उदारहरण के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता, कक्षा का सम्मान आदि|
  • पढाई-लिखाई में अधिकतर साधारण बालकों से श्रेष्ठ होते हैं क्योंकि इनमे उनकी वास्तविक रूचि होती है | ज्ञान प्राप्त करने में अधिक रूचि लेते हैं|
  • अधिक पाठ्यक्रम को कम समय में समझने की क्षमता होती है|

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सहगामी क्रियाएं(Cocuricurlar Activities)

  • प्रतिभाशाली बालक खेलों में अधिक रूचि लेते हैं , वे अपने से अधिक आयु के बच्चों में खेलना अधिक पसंद करते हैं| कम आयु के बच्चों के साथ वे कम समय व्यतीत करते हैं|
  • प्रतिभाशाली बालक उन खेलों और क्रियाओं में अधिक रूचि लेते हैं जिनमें मानसिक परिपक्वता की आवश्यकता होती है|
  • लेमन और विट्टी के अनुसार, प्रतिभाशाली लड़कियां अधिक खेल गतिविधियों में व्यस्त रहती हैं, लड़कों के बारे में यह बात विपरीत होती है| इनके अनुसार प्रतिभाशाली बालक शारीरिक खेलों में कम रूचि लेते हैं| ये पढाई-लिखाई के कार्यों में अधिक रूचि लेते हैं|
  • प्रतिभाशाली बालक स्कूलों में जाने में अधिक रूचि को प्रदर्शित करते हैं|

 

व्यक्तिगत विशेषताएं (Personal Characteristics)

  • प्रतिभाशाली बालक सहयोगी होते हैं|
  • यह सुझावों को मानने के लिए तैयार रहते हैं|
  • इनमे हास्य – विनोद का स्वाभाव अधिक होता है|
  • इनका सामाजिक समायोजन सामान्य बालकों की अपेक्षा अधिक होता है|
  • ऐसे प्रतिभावान बालकों को कक्षाओं में उनके सहपाटी अधिक पसंद करते हैं|
  • प्रतिभाशाली बालकों की संवेगात्मक स्थिरता उनकी प्रौढावस्था में भी निरंतर बनी रहती है|
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सामाजिक और सांस्कृतिक प्रष्ठभूमि(Social and cultural Background)

  1. सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि प्रतिभाशाली बालकों की उत्तम होती है|
  2. प्रतिभाशाली बालकों के परिवारों का सामाजिक और आर्थिक स्तर सामान्य से ऊपर होता है |
  3. कोल (1956 ) के  अध्ययनों से ज्ञात हुआ की प्रतिभाशाली बालकों के माता-पिता के व्यावसायिक स्तर में स=धनात्मक सहसंबंध पाया गया है, लेकिन यह सह-सम्बन्ध पूर्व-बाल्यकाल तक ही पाया गया|
  4. सामाजिक,शैक्षिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि प्रौढावस्था या युवावस्था की उपलब्धि में योगदान करती है लेकिन अभी तक इनका अनुपात मालूम नहीं हो सका |
  5. प्रतिभाशाली बालकों के माता-पिता सामान्य जनसँख्या से अधिक शिक्षित होते हैं|
  6. ऐसे बालकों के घर मोहल्ले या पडौसियों के घरों से श्रेष्ठ होते हैं|
  7. शहरी क्षेत्रों में अधिक प्रभावशाली व्यक्ति पाए जाते हैं|
  8. प्रतिभाशाली बालको के परिवार अधिक और उत्तम पुस्तकें, उपन्यास, पत्रिकाएं पढ़ते हैं|
  9. विद्वानों को उत्पन्न करने में सांस्कृतिक कारको की भूमिका का बहुत महत्त्व होता है | ऐसा अध्ययन इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में (1962) में बर्ट द्वारा किया गया था|

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प्रतिभाशाली बालकों की पहचान (Identification of Gifted Children)

प्रत्येक स्कूल या कक्ष में विभिन्न प्रकार के बालक होते हैं , उमने व्यक्तिगत विभिन्नताएं भी अधिक देखने को मिलाती हैं| इन व्यक्तिगत विभिन्नताओं के आधार पर प्रतिभाशाली बालकों का चयन करना अध्यापक के लिए चुनौती से कम नहीं होता | प्रतिभाशाली बालकों की पहचान करने के लिए अध्यापक को कई प्रकार की प्रविधियों का प्रयोग करना पड़ेगा, किसी एक प्राविधि द्वारा निश्चित कर पाना की कौनसा बालक प्रतिभाशाली है और कौनसा सामान्य बालक है, बहुत ही कठिन कार्य है, इनकी पहचान के लिए कुछ नीचे लिखी प्रविधिया इस्तेमाल की जा सकती हैं|

 

1-बुद्धि परीक्षा :- (Intelligence Test )- प्रतिभाशाली बालकों की पहचान के लिए अध्यापक विभिन्न प्रकार की बुद्धि परीक्षाओं का प्रयोग कर सकता है| ये बुद्धि परीक्षण व्यक्तिगत और सामूहिक होते है |बुद्धि परीक्षणों का वर्गीकरण भाषा के प्रयोग के आधार पर किया गया है, अर्थात शाब्दिक और अशब्दिक परीक्षण| शाब्दिक परीक्षाओं में कागज और पेन या पेंसिल का प्रयोग होता है और अशब्दिक परीक्षणों में कोई क्रिया करवाई जाती है | टरमन के अनुसार 140 या इससे अधिक बुद्धि लब्धि वाले बालक प्रतिभाशाली बालकों की श्रेणी में आते हैं|

 

2- प्रवणता परीक्षण (Aptitude Tests ):- जैसा की हमें मालूम है की प्रवणता बालकों के सम्मान को अभिव्यक्त करती है , यज सम्मान बालको की भविष्य की उन्नति के बारे में अनुमान लगाता है| अतः प्रवणता बालकों के भविष्य से सम्बंधित होती है, इस प्रकार के परीक्षणों के लिए अध्यापकों का प्रशिक्षण आवश्यक होता है, क्योकि ऐसे परीक्षणों से प्राप्त अंको का अर्थापन प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर सकता है|

 

3-निष्पत्ति परीक्षण (Achievement Test):- शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाशाली बालकों की खोज के लिए अध्यापक निष्पत्ति परीक्षणों की सहायता ले सकता है | इस प्रकार के परीक्षणों से बालकों की शैक्षिक उपलब्धियां बड़ी सुगमता से हो जाती है | और भी अन्य तरीके हो सकते हैं |

Type of children of educational Inclusion Gifted Children प्रतिभाशाली बच्चे
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प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा (Education of Gifted Children)

प्रतिभाशाली बालकों की समस्याओं और विशेषताओं को देखते हुए उनके लिए विशेष शिक्षा की आवश्यकता का अनुभव किया जाता है , उनकी शिक्षा के लिए अध्यापक को कुछ सिद्धांतों का अनुसरण करना चाहिए जो हमने श्रेणीबद्ध किये हुए हैं –

  • अवसरों की सामानता                             (Equality of Opportunity)
  • तीव्र प्रोन्नति नहीं                                      (No Rapid Promotion)
  • पाठ्यक्रम समृद्धि                                   (Enrichment fo Curricula)
  • असामाजिक आदतों का रोकना              (Prevention of Bad Social Habits)
  • सर्वांगीण विकास पर बल                        (Emphasis on Allround Development)
  • शिक्षा का आधार बालक का अध्ययन      (Basis of Education on Child Study)
  • प्रतिभाशाली का विशेष ध्यान देना            (Special Handling of Specilly gifted Children)
  • अहमन्यता को रोकना                             (Avoidance of Conceit and Snobbery)

 

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