Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे

Mental Retarded Children's मंदबुद्धि बच्चे

Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे , मित्रों आज हम मंदबुद्धि बालकों के बारे में पड़ेंगे मंद बुद्धि बालकों से संबंधित पूरी जानकारी आपको इस पोस्ट में मिल जाएगी पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें आप डीएलएड के तृतीय सेमेस्टर में पढ़ रहे हैं तो यह समावेशी शिक्षा एवं विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा निर्देशन एवं परामर्श विषय से संबंधित है।

Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे

मंदबुद्धि बच्चे या मानसिक मंदता का तात्पर्य औसत से कम मानसिक योग्यता(Below Average Mental Ability) से है। यह बच्चे प्रतिभाशाली बच्चों के ठीक विपरीत होते हैं। यह बच्चे अपनी मानसिक योग्यता और क्षमताओं की कार्य शक्ति में बेबस होते हैं। टर्मन के अनुसार 70 से कम बुद्धि लब्धि वाले बच्चे मंदबुद्धि बच्चे कहलाते हैं।

इन बच्चों को अल्प बुद्धि बच्चे(Mental Deficient),(Mental Handicapped), विकल्प बुद्धि, मूढ़ (Dull) भी कहते हैं। यह मानसिक रूप से अपरिपक्व होते हैं। इन बच्चों में सामाजिक समायोजन करने की क्षमता नहीं होती है। इन बच्चों में कुछ भावना ग्रंथियां(Mental Complexes), हीनता ग्रंथियां(Inferiority Complex) व श्रेष्ठता भावना ग्रंथि(Superiority Complex) पाई जाती है। इन बच्चों में संवेगात्मक स्थिरता नहीं पाई जाती, जिसके कारण इसमें अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं।

मानसिक हीनता या मंदिता को अनेक कारणों से; जैसे- वंश परंपरा, मानसिक आघात, बीमारी, अपरिपक्व जन्म, घर के कारण आदि से होती है। सामान्य तौर पर देखा जाए तो मंदबुद्धि बच्चे घर, समाज तथा शिक्षा संस्था में समायोजन करने में असमर्थ होते हैं। यह बच्चे मानसिक क्रियाओं में सामान्य बच्चों की बराबरी कभी नहीं कर पाते हैं।

Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे

Mental Retarded Children's मंदबुद्धि बच्चे
Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे

पोलक व पोलक (Pollock And Pollock) के अनुसार-

मंदबुद्धि बच्चों को अब क्षीण बुद्धि बच्चों के समूह में नहीं रखा जाता है। जिनके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। अब हम यह स्वीकार करते हैं, कि उनके व्यक्तित्व के उतने ही विभिन्न पहलू होते हैं, जितने सामान्य बच्चों के व्यक्तित्व के होते हैं।

जे.डी. पेज ( J. D. Page) के अनुसार-

मंदबुद्धि बच्चे जन्म के समय या बचपन के शुरू के वर्षों में पाई जाने वाली सामान्य से कम मानसिक विकास की ऐसी अवस्था है जो उसमें बुद्धि संबंधी कमी तथा सामाजिक अक्षमता के लिए उत्तरदाई होती हैं।

कप्पूस्वामी (Kappuswamy) के अनुसार-

शैक्षिक पिछड़ापन अनेक का परिणाम है अधिगम में मंदता उत्पन्न करने के लिए अनेक कारक एक साथ मिल जाते हैं।

मंदबुद्धि बच्चों की विशेषताएं (Characteristics of Mental Retarded Children’s)

  1. इन बच्चों की समझ में कोई भी बात सरलता से नहीं आती है।
  2. इन बच्चों में स्वयं निर्णय लेने की शक्ति नहीं होती है।
  3. यह बच्चे प्रायः कक्षा में पीछे बैठते हैं और छिपने का प्रयास करते रहते हैं।
  4. इन बच्चों में आत्मविश्वास का अभाव होता है, और अपने आप को कमजोर समझते हैं।
  5. यह बच्चे शारीरिक रूप से हीन होते हैं।
  6. इन बच्चों की सीमित व साधारण रुचियां होती हैं अधिक क्षेत्रों में रुचि नहीं रखते हैं।
  7. इनमें संवेगात्मक स्थिरता नहीं होती है।
  8. अन्य कारण और भी हैं जैसे माता का शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य ठीक न होना या किसी गंभीर रोग से पीड़ित होने के कारण भी बच्चा मंदबुद्धि हो जाता है।
  9. संतुलित आहार उचित पोषण के अभाव में भी बच्चा मानसिक रूप से पिछड़ जाता है।
  10. मानसिक चिंता तनाव व संघर्ष के कारण भी बच्चे की बुद्धि का विकास नहीं हो पाता है।
  11. मांस मदिरा आदि पदार्थ जो मस्तिष्क में प्राकृतिक गर्मी पहुंचाते हैं इसके सेवन से भी मस्तिष्क विकृत हो जाता है।

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मंदबुद्धि बच्चों की समस्याएं(Problems of Mentally Retarded Children)

मंदबुद्धि बच्चों के समायोजन में घर समाज परिवार व शिक्षा संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं यह सभी साथ साथ चलते हैं किसी एक के बिना भी बच्चे का विकास पूर्ण नहीं हो सकता मंदबुद्धि बच्चों की कुछ प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं आइए देखते हैं-

1- शारीरिक व मानसिक विकास की समस्या-

मंदबुद्धि बच्चों के विकास में शारीरिक व मानसिक समस्याएं महत्वपूर्ण होती हैं। यह अन्य बच्चों के समान अपनी दिनचर्या को सही ढंग से नहीं कर पाते । जैसे- कम दिखाई देना, आवाज स्पष्ट ना होना, सही न चल पाना आदि। जब बच्चा शारीरिक रूप से विकृत हो जाता है, तो उसका मानसिक विकास भी नहीं हो पाता और वह किसी भी कार्य को सही ढंग से सोचकर नहीं कर पाता है।

2- पारिवारिक समायोजन (Family Adjustment)-

बच्चे के जन्म के बाद यह पता नहीं लगता कि वह मंदबुद्धि बच्चा है इसलिए उसे किसी मनोवैज्ञानिक या कुशल चिकित्सक को दिखाना चाहिए माता-पिता भाई-बहन अन्य परिवार के सदस्यों को बच्चे में अच्छी आदतों के निर्माण करने में सहायता देनी चाहिए।

3- शिक्षा संस्था में समायोजन (Adjustment In School)

मंदबुद्धि बच्चों की शिक्षा के लिए समान समूह विधि पर बल देना चाहिए इस विधि में बच्चों को उनकी मानसिक योग्यता विशिष्ट योग्यता के आधार पर समूहों में बांटना चाहिए इसमें मंदबुद्धि बच्चों को असफलता का भय नहीं रहता क्योंकि इसमें अनेक वैसे ही सहभागी होते हैं स्कूलों में मंदबुद्धि बच्चों के लिए उद्योगों हस्तकला आज का आयोजन करना चाहिए ताकि वे इसके काबिल बन सके कि अपना जीवन यापन कर सकें।

4- समाज में समायोजन( Adjustment in Society)

मंदबुद्धि बच्चे से समाज में कोई अन्य व्यक्ति मेलजोल बढ़ाना पसंद नहीं करते जिसके कारण इनमें हीन भावना घर कर जाती है अतः मंदबुद्धि बच्चों के समायोजन के लिए उनके प्रति सहानुभूति पूर्वक प्रेम का व्यवहार करना चाहिए इनकी मानसिक योग्यताओं को ध्यान में रखकर इनके लिए पार को पुस्तकालय वाचनालय आदि की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि यह बच्चे वहां जाकर आपस में खेल सके वह स्वावलंबी बन सके।

Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे

Mental Retarded Children's मंदबुद्धि बच्चे
Mental Retarded Children’s मंदबुद्धि बच्चे

मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम व उपचार(Preventive And Remedial Measures)

अभी तक हमने जो पढ़ा उससे यह पता चलता है कि मानसिक पिछड़ेपन के लिए वंशानुक्रम एवं वातावरण दोनों समान रूप से जिम्मेदार होते हैं इसलिए केवल माता-पिता को इसका जिम्मेदार नहीं मानना चाहिए जिस वातावरण में बच्चा रह रहा है वह जहां लालन-पालन तथा पोषण हो रहा है वह भी बच्चे के मानसिक विकास पर सीधे या उल्टे तौर पर प्रभाव डालता है।

1- वातावरण में सुधार(Improvement in environment)- बच्चे को स्वस्थ वातावरण में रखना चाहिए उसके विकास के लिए उपयुक्त सुविधाएं व अवसर जुटाने का प्रयास करना चाहिए जिससे कि वह वातावरण में उपस्थित शक्तियों के साथ सामंजस्य बैठा सके।

2- माता-पिता की उचित देखभाल(Proper Treatment of Mother)- गर्व काल में माता-पिता को उचित चिकित्सा की आवश्यकता होती है जिससे वह किसी भी बीमारी रोग को पोषण आदि से ग्रसित ना हो जाए और अगर उसमें ऐसी कोई भी कमी आती है तो उसका समय पर पता चल सके वह उसका उपचार हो सके ताकि गर्भ में शिशु में किसी प्रकार का विकार ना हो।

3- जन्म दर पर नियंत्रण(Control on Birth)-

जो माताएं ज्यादा शिशुओं को जन्म देती हैं वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती हैं और इस अवस्था में जब वह किसी अन्य शिशु को जन्म देती हैं तो वह मानसिक रूप से कमजोर हो जाती हैं तथा जो माता-पिता पहले से ही मानसिक रूप से पिछड़े होते हैं उनकी संतान में भी ऐसे गुण आने की संभावना ज्यादा रहती है इससे बचने के लिए ऐसे माता-पिता की नसबंदी कर देनी चाहिए ताकि मानसिक रूप से विपक्ष बच्चों का जन्म ही न हो पाए।

4- शिक्षकों का व्यवहार, चयन व कार्य में सुधार(Improvement in Behavior, Selection and Work of the Teacher)-

शिक्षकों को ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए उनकी रूचि का पता लगाना चाहिए समय-समय पर उन्हें परामर्श व निर्देशन प्रदान करना चाहिए। शिक्षक को बच्चों की आवश्यकताओं का अध्ययन करके उनको पूर्ण करने का प्रयास करना चाहिए। शिक्षक को बच्चों के साथ स्नेह पूर्ण सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना चाहिए ऐसे बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापकों का व्यवहार सहनशील होना चाहिए, ताकि बच्चे अपनी बात को सहजता से अध्यापकों के सामने रख सकें।

5- व्यक्तिगत ध्यान व शिक्षण( Individual Attention and Teaching)-

अध्यापक को ऐसे बच्चों का व्यक्तिगत रूप से ध्यान रखना चाहिए इसके लिए कक्षा में छात्रों की संख्या 12 से 15 तक होना चाहिए जिससे प्रत्येक बच्चे पर ध्यान दिया जा सके।

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