Creative Children Circumstances And Solution सृजनात्मक बच्चे समस्या और समाधान

Creative Children Circumstances And Solution सृजनात्मक बच्चे समस्या और समाधान

Creative Children Circumstances And Solution सृजनात्मक बच्चे समस्या और समाधान, दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम सृजनात्मक बच्चों के बारे में बताने वाले हैं सृजनात्मक बच्चों का अर्थ सृजनात्मक बच्चों की विशेषताएं समस्याएं और शैक्षिक प्रावधानों के बारे में इस पोस्ट में बात करेंगे पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें आप की सभी समस्याओं और सवालों के जवाब इस पोस्ट में छुपे हैं।

सृजनात्मक बच्चों से तात्पर्य(Means of Creative children)

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास में वैज्ञानिकों की भांति सृजनशील योग्य लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है सृजनात्मकता व्यक्ति का मौलिक गुण है प्रत्येक व्यक्ति में यह गुण किसी न किसी मात्रा में पाया जाता है वास्तव में संसार के समस्त प्राणियों में सृजनात्मकता होती है मानव जीवन को सुखमय बनाने के लिए नवीन अविष्कार करने तथा समस्याओं का समाधान खोजने के कार्य में सृजनात्मकता या रचनात्मकता बच्चे के अंदर वह योग्यता है जो नवीन वस्तु का निर्माण करने समस्याओं का समाधान ढूंढने नवीन परिस्थितियों में समायोजन करने , जीवन में एक अभिनव समझ सोच और व्यवहार से होता है विद्यालय में अनेक ऐसे बच्चे होते हैं जिनकी प्रकृति सृजनात्मक होती है तुलनात्मक बच्चों को उनकी योग्यता अनुसार शिक्षा व्यवस्था करना प्रत्येक समाज व राष्ट्र का कर्तव्य होता है क्योंकि ऐसे बच्चे समाज व राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होते हैं तथा सामाजिक एवं राष्ट्रीय विकास में अपूर्व योगदान करते हैं।

सृजनात्मकता व्यक्ति का मौलिक गुण होता है इसका तात्पर्य कोई नई वस्तु बनाना नए विचार देना नवीनतम अनुसंधान करना आदि से होता है कुछ मनोवैज्ञानिकों ने सृजनात्मकता का अर्थ साहसिक चिंतन नवीन अनुभव परंपरागत लोक से हटकर नए रास्ते पर चलना आदि बताया है।

Creative Children Circumstances And Solution सृजनात्मक बच्चे समस्या और समाधान

मनोवैज्ञानिक (Crow and Crow) का मानना है कि सृजनात्मकता मौलिक परिणामों को अभिव्यक्त करने की मानसिक प्रक्रिया है।

वेबस्तर (Webster) शब्दकोष के अनुसार ‘क्रिएटिविटी ‘ शब्द की उत्पत्ति “केरे” शब्दसे हुई मानी जाती है | जिसका तात्पर्य-अस्तित्व में आना है| इस शब्द कोष में ‘क्रिएट’ जब एक क्रिया के रूप में प्रयोग होता है जो इसका तात्पर्य अस्तित्व में लाना अथवा मौलिक रूप में उत्पन्न होना है और जब यही शब्द विशेषण के रूप में ‘क्रिएटिव के रूप में प्रयोग किया जाता ही तो उसका अभिप्राय-योग्यता, शक्ति, कल्पना आदि से लिया जाता है|

Creative Children Circumstances And Solution सृजनात्मक बच्चे समस्या और समाधान
Creative Children Circumstances And Solution सृजनात्मक बच्चे समस्या और समाधान

1- मैडनिक(Mednik) के अनुसार-‘श्रीजनात्मक चिंतन में साहचर्य के तत्वों का मिश्रण रहता है जो विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ती करने के लिए संयोग्शील होते हैं या किसी अन्य में लाभदायक होते हैं | नवीन संयोग के विचारों में आपसी दूरी जितनी अधिक होगी, सृजनात्मकता की संभावना उतनी ही अधिक होगी|

2- गिल्फोर्ड (Guilford) के अनुसार-‘ सृजनात्मक बच्चों में प्रायः सामान्य गुण होते हैं , उनमें न केवल मौलिकता का गुण होता है वरन उनमें लचीलापन,प्रवाहमयता,प्रेरण एवं संयमता की योग्यता भी पाई जाती है|

3-टोरेंस (Torrance) के अनुसार-“रचनात्मक समस्याओं, कठिनाइयों,ज्ञान में अतंराल , खोये हुए तत्व, अव्यवस्था आदि , कठिनाई की पहचान करना, हलों की खोज करना, अनुमान करना या कमियों के लिए परिकल्पना बनाना, इन परिकल्पनाओं का परीक्षण और पुनर्परीक्षण करना और संभवतः उन्हें सुधारना और परीक्षण करना और अंत में परिणामों को देने की प्रक्रिया है|”

4-स्टेन (Stain) के अनुसार-” सृजनात्मकता वह कार्य है जिसका परिणाम नवीन हो और किसी समय किसी तरह किसी समूह द्वारा उपयोगी और संतोषजनक रूप से स्वीकार किया जाए|”

5- लूथी (Luthe) के अनुसार-” सृजनात्मकता किसी चीज को वास्तव में उत्पन्न करने, बनाने या अभिव्यक्त करने, या कम से कम एक भाग में स्वयं से उत्पन्न होती है की योग्यता और सुविधा है|”

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बच्चों में सृजनात्मकता विकसित करने के कुछ उपाय ( Some Measure f0r Development of Creativity among Children)

वास्तविक रूप से प्रोढ़ों की तुलना में बच्चों में सृजनात्मक पृवृत्ति अधिक पाई जाती है जो की इनकी एक स्वाभाविक प्रवृति होती है| शिक्षकों का यह उत्तरदायित्व होता है की बच्चों की सृजनात्मक शक्ति की पहचान कर उन्हें उचित दिशा में विकास के लिए अवसर प्रदान करें जिससे की समाज व् राष्ट्र का हित हो सके तथा अन्तर्निहित शक्ति का सदुपयोग हो| बच्चों में सृजनात्मकता विक्सित करने के कुछ उपाय इस प्रकार हो सकते हैं

1- सृजनात्मक बच्चों की पहचान, सृजनात्मक बच्चों की विशेषताओं के आधार पर किया जा सकता है-

  1. मौलिकता का दर्शन
  2. स्वतंत्र निर्णय क्षमता
  3. संवेदनशीलता पूर्ण व्यवहार
  4.  उत्सुकता ब जिज्ञासा
  5.  परिहास प्रियता व हंसी मजाक का स्वभाव
  6. स्वायत्तता का भाव विद्यमान
  7. जटिल प्रश्नों को हल करने की प्रवृत्ति
  8. एकांत प्रिय परिश्रमी व साहसी स्वभाव

2-मानसिक स्वास्थ्य पर बल दिया जाता है क्योंकि मनोवैज्ञानिक सुरक्षा तथा मनोवैज्ञानिक स्वतंत्रता बच्चों में सृजनात्मक शक्ति विकसित करने के लिए दो आवश्यक दशाएं हैं जो मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती हैं|

3-शिक्षकों द्वारा बच्चों को समस्या समाधान के लिए आवश्यक व उपायुक्त तथ्यों को सिखाया जाए|

4-समस्या समाधान की योग्यता की पहचान कर शिक्षक को प्रोत्साहित करना चाहिए इस बारे में स्टैनले ग्रे ने कहा है की समस्या समाधान की योग्यता 2 पदों पर निर्भर करती है-

  • व्यक्ति में अधिगम करने की क्षमता व बुद्धि
  •  क्या व्यक्ति ने क्षमता का अधिगम पा लिया है

5-किसी कार्य का प्रतिफल क्या होगा इस पर विचार करने के लिए बच्चों को प्रेरित करना|

6- शिक्षकों का यह कर्तव्य होना चाहिए कि वह तथ्यों के आधार पर छात्रों को मौलिकता का दर्शन कराएं तथा नवीन कार्य का विचार करने का प्रयास करवाएं|

7-छात्रों को कल्पनाशीलता की शक्ति को विकसित करने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराएं|

8-छात्रों में स्वयं का मूल्यांकन करने की क्षमता का विकास किया जाना चाहिए|

9-छात्रों में रचनात्मक शक्ति के विकास के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाना चाहिए|

सृजनात्मक बच्चों के लिए शैक्षिक प्रावधान-

इस प्रकार के बच्चों में सृजनात्मकता एक मौलिक शक्ति होती है एक सर्जनात्मक बच्चा उसे माना जाता है जो सृजनात्मक चिंतन करता है वर्ष 1950 में गिलफोर्ड ने अपने बुद्धि संरचना प्रतिमान में यह स्पष्ट किया था कि अपचारी चिंतन सृजनात्मक से संबंधित होती है गिलफोर्ड ने अपने अध्ययनों के आधार पर यह स्पष्ट किया कि सृजनात्मकता का बुद्धि लब्धि से कोई संबंध नहीं है और इसे वातावरण के प्रभाव के अंतर्गत विकसित किया जा सकता है अतः उपयुक्त वातावरण सृजनात्मकता के विकास के लिए उपयोगी होता है जो वातावरण शिक्षा द्वारा ही उत्पन्न किया जा सकता है इसके लिए शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बातें हैं जिन पर ध्यान देना होगा-

  • विद्यालय का वातावरण इस प्रकार बनाया जा सके जिससे धनात्मक का के विकास में मदद प्राप्त हो|
  •  छात्रों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर प्रदान करना चाहिए|
  •  सृजनशील बच्चों के कार्यों व्यवहारों व विचारों को समस्त छात्रों के सम्मुख प्रदर्शित किया जाना चाहिए|
  •  सृजनशील बच्चों के प्रति व्यक्तिगत रुप से ध्यान दिया जाना चाहिए|
  •  शिक्षण की प्रक्रिया इस प्रकार से बनाए जिससे बच्चों में रचनात्मकता का विकास हो सके|
  •  बच्चों को विद्यालय प्रवेश में पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान किया जाना चाहिए जिससे उनमें सृजनात्मक चिंतन विकसित हो सके|
  •  बच्चों में प्रति शिक्षक का व्यवहार मृदुल व सहानुभूति पूर्ण होना चाहिए|
  •  बच्चों में सृजनात्मक शक्ति के विकास के लिए शिक्षण को आवश्यक व उपयोगी दिशा निर्देश देना चाहिए|

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